मातृत्व (Motherhood) - By Smriti Razdan

मातृत्व...

अभिव्यक्ति करूँ कैसे

इस आभास की?

हूँ मैं प्रफुल्लित,

या हूँ अचम्भित अभी?

मानस पटल पर मेरे,

विचार हैं उभरते, बिखरते, संवरते...

मिश्रित से भाव हैं कोलाहल यूँ करते...

माँ !! अब यह शब्द नहीं केवल,

परिभाषा परिवर्तित हो रही,

दे रही अंतस को संबल...

मातृत्व हो रहा जीवंत अंतर्मन में...

पल्लवित हो रहा एक जीवन अंकुश

मुझ मैं !

हूँ मैं प्रफुल्लित या हूँ अचम्भित अभी,

निस्संदेह प्रतीक्षा में हूँ सुखद मातृत्व की!

Motherhood...

How do I articulate this feeling

I am euphoric,

And I’m perplexed too,

Multiple thoughts emerge, scatter, build up in my mind and heart,

And create a symphony of mixed emotions.

Mother is no more just a word,

But it’s meaning is shaping into a reality,

Fielding the courage in my heart...

And awakening motherhood within me,

A seed of life is growing within me,

and I’m elated and in awe too...

Undoubtedly I’m waiting to experience,

The bliss of motherhood.




46 views